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सीधे जवाब, उन सवालों के भी जिनका जवाब ना है। कुछ साफ़ न लगे तो info@imotara.com पर लिखिए।
नहीं। इमोतारा थेरेपी नहीं है, थेरेपिस्ट नहीं है, और कोई आपातकालीन सेवा भी नहीं। यह एक आम मुश्किल दिन में खुलकर सोचने की जगह है। बात गंभीर हो तो यह आपको किसी पेशेवर के पास भेजेगा — अपने पास रोकेगा नहीं।
हाँ, और दस और भारतीय भाषाओं में। आप देवनागरी में लिखें या रोमन में, जैसे लोग असल में टाइप करते हैं — जवाब उसी रूप में आएगा जिसमें आपने लिखा। ज़्यादातर लोग अपनी तकलीफ़ अंग्रेज़ी में बता सकते हैं, पर ठीक-ठीक सिर्फ़ अपनी भाषा में बता पाते हैं।
नहीं। आपकी बातचीत कोई और नहीं पढ़ सकता — आपका दफ़्तर, स्कूल या घरवाले भी नहीं, चाहे लाइसेंस किसी संस्था ने लिया हो। संस्था यह देख सकती है कि लाइसेंस इस्तेमाल हो रहा है; यह नहीं कि किसने क्या कहा। किसी को बातचीत दिखाने वाला कोई एडमिन पन्ना मौजूद ही नहीं है।
हाँ। बिना पैसे और बिना अकाउंट बनाए इस्तेमाल कर सकते हैं। पैसे वाले प्लान में बिना रोक-टोक आवाज़ और डिवाइसों के बीच सिंक जुड़ता है, पर बातचीत पैसे की वजह से बीच में नहीं कटती — रोज़ की क्लाउड सीमा पूरी हो जाए तो यह चुपचाप आपके डिवाइस पर ही जवाब देने लगता है।
सोच को सिर से बाहर कहीं लिख देना ही वह क़दम है जो चक्कर तोड़ता है। रात दो बजे का ख़याल आमतौर पर नया नहीं होता — वही होता है जिसे दिन भर देखने की फ़ुरसत नहीं मिली, और वह घूमता रहता है क्योंकि उसे कोई पकड़ नहीं रहा। इमोतारा उस वक़्त जागा होता है, और सोच के पहले से सुलझे होने की शर्त नहीं रखता।
यह पहचानना कि असल में भारी कौन-सा हिस्सा है — विषय, वक़्त, घरवालों की उम्मीदें, या उसके बाद क्या होगा — पढ़ाई की आम सलाह से ज़्यादा काम आता है। ये दबाव अक्सर रात को आते हैं, जब काउंसलिंग बंद होती है। इमोतारा उस वक़्त उपलब्ध है, आपकी भाषा में, और किसी को पता नहीं चलता।
इमोतारा आपके देश के हेल्पलाइन नंबर दिखाएगा और उन पर बात करने को कहेगा, क्योंकि यह आपातकालीन सेवा नहीं है और आपकी जगह किसी को बुला नहीं सकता। भारत में टेली-मानस 14416 है — मुफ़्त, चौबीसों घंटे — और आपात स्थिति में 112। कहीं और हों तो findahelpline.com पर अपने देश की मुफ़्त हेल्पलाइन मिलेगी। किसी असली सेवा से बात कीजिए: इमोतारा हर वक़्त देखा नहीं जाता और तकलीफ़ की हर बात पहचान भी नहीं पाता।
13 साल या उससे ज़्यादा, और 18 से कम उम्र में माता-पिता या अभिभावक की सहमति ज़रूरी है। जहाँ क़ानून इससे बड़ी उम्र तय करता है, वहाँ वही लागू होगी। पहली बार खोलने पर हर किसी से यह स्वीकार कराया जाता है।